स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भीषण टक्कर के बाद लोगों में भारी नाराजगी है। हादसे में कम से कम 68 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 100 लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। स्पेन की ट्रेड यूनियन सीएसआईएफ ने मंत्री पर जवाबदेही से बचने और हादसे का ठीकरा रेलवे के एक अधिकारी पर फोड़ने का आरोप लगाया है। वहीं, प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने हादसे की विस्तृत जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
परिवहन मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन
हादसे के खिलाफ बुधवार रात मैड्रिड में परिवहन मंत्रालय के बाहर करीब 500 लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और रेलवे प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर बोतलें और फ्लेयर फेंके, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हादसे की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। वहीं, सीएसआईएफ यूनियन ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले सरकार को रेलवे अधिकारियों के खिलाफ कोई निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए। यूनियन ने आरोप लगाया कि परिवहन मंत्री अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय एक रेलवे कर्मचारी को बलि का बकरा बना रहे हैं।
कैसे हुआ दो हाई-स्पीड ट्रेनों का हादसा?
स्पेन के टोलेडो प्रांत में उरदा के पास बुधवार को यह रेल हादसा हुआ। मैड्रिड से सेविले जा रही सरकारी रेलवे कंपनी रेनफे की हाई-स्पीड ट्रेन एक खड़ी इरियो ट्रेन से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई डिब्बे पटरी से उतर गए और कुछ डिब्बे ढलान की ओर जा गिरे। हादसे के बाद घटनास्थल पर बचाव अभियान चलाया गया और क्षतिग्रस्त डिब्बों में फंसे लोगों की तलाश की गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, रेलवे सुरक्षा प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ी के कारण करीब 63 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। सुरक्षा प्रणाली के बंद होने के बाद कई ट्रेनें अपने आप रुक गईं। इसके बाद रेलवे के नियंत्रण केंद्र ने ट्रेनों को दोबारा चलाने की अनुमति दी। परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते के अनुसार, नियंत्रण केंद्र से रेनफे ट्रेन को सामान्य गति से आगे बढ़ने की अनुमति देना गलत फैसला था, क्योंकि लाल सिग्नल अभी भी लागू था। उन्होंने इस आदेश को समझ से परे बताया। हादसे की असल वजह का पता लगाने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए जांच अभी जारी है।
इस्तीफे की मांग पर मंत्री ने क्या कहा?
हादसे के बाद ऑस्कर पुएंते से उनके इस्तीफे को लेकर सवाल पूछे गए। उन्होंने फिलहाल पद छोड़ने की योजना से इनकार किया। मंत्री ने कहा कि उनकी प्राथमिकता हादसे की वजहों का पता लगाना और पूरी घटना को स्पष्ट करना है। उन्होंने दुर्घटना के बाद सामने आए शुरुआती तथ्यों का जिक्र करते हुए बताया कि सुरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी के बाद ट्रेनों को दोबारा चलाने के फैसले की जांच जरूरी है। मंत्री के मुताबिक, नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में ट्रेनों को सीमित गति और विशेष सावधानी के साथ चलाया जाना चाहिए था। वहीं, सीएसआईएफ यूनियन ने परिवहन मंत्री के रवैये पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। यूनियन का कहना है कि रेलवे कर्मचारियों के कार्य घंटों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे। इन दावों की पुष्टि करने और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच जारी है।
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने जांच का दिया भरोसा
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने दुर्घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार हादसे के हर पहलू की गहन जांच कराएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही या खामी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद बचाव दलों ने रातभर घटनास्थल पर राहत और बचाव अभियान चलाया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि मृतकों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई। दुर्घटना का असर मैड्रिड और दक्षिणी अंदालुसिया के बीच हाई-स्पीड रेल सेवाओं पर भी पड़ा। इस मार्ग पर गुरुवार को ट्रेन सेवाएं निलंबित रहीं। स्पेन में इस साल यह दूसरा बड़ा रेल हादसा बताया जा रहा है। इससे पहले जनवरी में अदामुज में हुई दुर्घटना में 46 लोगों की जान गई थी। लगातार हुए हादसों के बाद रेलवे सुरक्षा, रखरखाव और संचालन से जुड़े प्रोटोकॉल पर सवाल उठने लगे हैं।
रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यूरोप में स्पेन के पास सबसे बड़ा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है। ऐसे में लगातार हो रहे बड़े रेल हादसों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा दुर्घटना में तकनीकी खराबी और नियंत्रण केंद्र से जारी आदेश की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी कैसे हुई, किन परिस्थितियों में ट्रेनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई और सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं हो सका। जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति या संस्था को अंतिम रूप से जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। इस हादसे ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब जांच के निष्कर्षों और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सबकी नजर है।