Dularchand Yadav Murder Case And Anant Singh: मोकामा से विधायक अनंत सिंह की राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें गहरी होती जा रहीं। जदयू (JDU) ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 वर्षों के लिए दल से बाहर किया है। अनंत की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की है। प्रशासन ने नीलम को पटना का सरकारी बंगला छोड़ने का नोटिस दिया है। यहां अनंत सिंह रह रहे। इस बीच 30 अक्टूबर की तारीख बेहद संवेदनशील मानी जा रही। इस दिन सुप्रीम कोर्ट में दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को मिली जमानत रद्द करने पर सुनवाई होगी।
30 अक्टूबर: सर्वोच्च अदालत के फैसले पर टिकीं नजरें
दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने Patna Highcourt के फैसले के विरुद्ध अदालत में याचिका दी है। उनकी मांग है कि अनंत की जमानत खारिज कर उन्हें जेल भेजा जाए। बिहार सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अनंत के पुराने रिकॉर्ड सौंपे हैं। बता दें, 2025 के बिहार चुनाव में अनंत जदयू से प्रत्याशी थे। दुलारचंद जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। 30 अक्टूबर 2025 को प्रचार के वक्त हिंसक झड़प में दुलारचंद की जान गई थी। घटना बाद अनंत जेल भेजे गए थे। मगर, जेल में रहते वे चुनाव जीते।
निष्कासन पर अनंत सिंह का पलटवार
पार्टी से निकाले जाने के बाद अनंत सिंह ने जदयू नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपनी बेगुनाही का दावा करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा और कहा कि जिन्होंने पार्टी खड़ी की, आज वही इसे चलाने में असमर्थ हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि उन्हें बाहर निकालने वालों को आने वाले चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। भविष्य की योजनाओं पर अनंत सिंह ने नया राजनीतिक दल बनाने के संकेत दिए। उन्होंने याद दिलाया कि जब सरकार गिरने की कगार पर थी, तब उन्होंने इसे डूबने से बचाया था।
सियासी बैठकों का दौर तेज
अनंत सिंह पर कार्रवाई के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई थी। रविवार सुबह केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके आवास में मुलाकात की। उसी दिन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 7, सर्कुलर रोड स्थित आवास पर उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी, मंत्री निशांत कुमार और एमएलसी ललन सर्राफ की बैठक हुई। बैठक खत्म होने के बाद विजय चौधरी और निशांत कुमार निकल गए। नीतीश बाद में ललन सर्राफ के साथ बाहर आए। इस घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी काम करने वालों पर कार्रवाई का पूरा अधिकार पार्टी अध्यक्ष को होता है। उन्होंने इसे बेवजह तूल न देने की बात कहते हुए कहा कि इस फैसले का क्या असर होगा, यह तो भविष्य तय करेगा।
घर पर आतिशबाजी और संगठन पर गाज
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा अनंत सिंह और नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर 6 साल के लिए निष्कासित करने के आदेश के बाद मोकामा विधायक की सदस्यता रद्द करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा जा चुका है। दिलचस्प बात रही कि पार्टी से निष्कासन की सूचना आते ही अनंत सिंह के पटना स्थित आवास पर समर्थकों ने पटाखे फोड़ खुशी जताई थी। दूसरी तरफ जदयू ने कार्रवाई बढ़ाते हुए संगठनात्मक जिला बाढ़ की पूरी कार्यकारिणी भंग की। वहां के जिलाध्यक्ष मयंक राज को पदमुक्त किया।