Anant Singh News : बिहार की राजनीति में फिर भूचाल आ गया है। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार को जनता दल यूनाइटेड (JDU) से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अनुशासनहीनता और बगावत के आरोपों के चलते पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। JDU ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से संपर्क कर 10वीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की भी मांग की है। इस सियासी घटनाक्रम के बाद पटना से दिल्ली तक की राजनीति गरमा गई है। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद, बगावत की वजह और अनंत सिंह के अगले राजनीतिक कदमों से जुड़ी हर बड़ी बात।
पूरे विवाद की शुरुआत : MLC चुनाव और बगावत
जेडीयू ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को मैदान में उतारा था, लेकिन अनंत सिंह ने पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर खुलेआम नीरज कुमार का विरोध किया और जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के लिए प्रचार किया। अनंत सिंह का आरोप था कि नीरज कुमार ने पिछले चुनावों में उनके खिलाफ काम किया था। इसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत 24 अक्टूबर को जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
अनंत सिंह का पलटवार : नीतीश की सेहत और पार्टी पर तीखे हमले
पार्टी से निकाले जाने के बाद अनंत सिंह ने आक्रामक रुख अपनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इशारों-इशारों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पार्टी के नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला:-
पार्टी चलाने पर सवाल : अनंत सिंह ने कहा कि जिसने पार्टी बनाई थी, आज वे खुद पार्टी नहीं चला पा रहे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि नीतीश जी बीमार रहते हैं, और जिन्होंने उन्हें पार्टी से बाहर निकालने का फैसला किया है, वे आने वाले चुनाव में इसका परिणाम भुगतेंगे।
गद्दारी और वफादारी का जिक्र : अनंत सिंह ने दावा किया कि जब सरकार गिर रही थी, तब उन्होंने सरकार को बचाया था और इस पार्टी के लिए गद्दारी भी की थी। उन्होंने कहा कि पार्टी में अब नीतीश कुमार के मन से कुछ नहीं हो रहा है।
ललन सिंह पर तंज : एक दिन पहले जब मीडिया ने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को लेकर सवाल पूछा था तो अनंत सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि कौन ललन सिंह की बात कर रहे? 100 ललन सिंह हैं। हम उनको नहीं जानते। वैसे, दूसरे बयान में उन्होंने खुद को नीतीश कुमार का भक्त बताया और कहा कि वह हमेशा नीतीश जी को मानते रहेंगे, चाहे पुलिस उन पर जुर्माना क्यों न लगा दे।
जेडीयू के भीतर विरोध : वाल्मिकी सिंह का तीखा बयान
जेडीयू के इस कड़े कदम से पार्टी के भीतर भी असंतोष सुलगने लगा है। जेडीयू के पूर्व एमएलसी वाल्मिकी सिंह ने अनंत सिंह पर हुई कार्रवाई की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जो दो-चार लोग आज पार्टी का नेतृत्व संभाल रहे हैं, वे पार्टी को डुबाने में लगे हैं। वाल्मिकी सिंह के अनुसार जेडीयू में जो लोग नीतीश कुमार के सच्चे समर्थक हैं और चाहते हैं कि निशांत कुमार आगे बढ़ें, उन्हें धीरे-धीरे पार्टी से हटाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई बिल्कुल गलत थी और ऐसा नहीं होना चाहिए था।
अनंत सिंह के सामने अब क्या राजनीतिक विकल्प हैं?
जेडीयू से निकाले जाने के बाद मोकामा के 'छोटे सरकार' के अगले कदम को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है:
नई राजनीतिक पार्टी का गठन : अनंत सिंह ने संकेत दिए हैं कि वे अपनी खुद की नई राजनीतिक पार्टी बना सकते हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक नया संगठन खड़ा करना और समर्थकों को एक बैनर तले लाना एक बड़ी चुनौती होगी।
निर्दलीय या अन्य दलों के साथ तालमेल : अनंत सिंह का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि वे किसी एक दल के मोहताज नहीं रहे हैं। वे जेडीयू, आरजेडी और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 में मोकामा विधानसभा सीट से लगातार जीतते आए हैं। मोकामा में उनका अपना मजबूत निजी जनाधार है। ऐसे में वे निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं या एमएलसी चुनाव में साथ देने वाली प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' पार्टी या आरजेडी के साथ हाथ मिला सकते हैं।
विधायकी पर संकट और कानूनी लड़ाई
जेडीयू ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को पत्र लिखकर संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। वैसे, संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ पार्टी से निकाले जाने मात्र से किसी विधायक की सदस्यता स्वतः खत्म नहीं होती। अयोग्यता का यह पूरा मामला जेडीयू द्वारा पेश किए गए सबूतों और विधानसभा स्पीकर के विवेकाधिकार पर निर्भर करेगा। स्पीकर अनंत सिंह के खिलाफ अयोग्यता का फैसला सुनाते हैं तो उनके पास इस फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का कानूनी रास्ता खुला रहेगा।
क्या नीतीश कुमार करेंगे मध्यस्थता?
जेडीयू की इस सख्त कार्रवाई के बावजूद अनंत सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके निजी रिश्ते आज भी अच्छे हैं। वैसे, मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बात की संभावना बेहद कम है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संगठन और अनंत सिंह के बीच इस बड़े टकराव में दखल देकर कोई सुलह करवाएंगे। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मोकामा के 'छोटे सरकार' अपनी विधायकी बचाने में कामयाब होते हैं या अपनी नई पार्टी का ऐलान कर बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिखते हैं।