Justice SK Kaul : भारतीय राजनीति और न्याय जगत में उस वक्त भारी हलचल मच गई, जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व राज्यसभा सदस्य महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस संजय किशन कौल और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास के बीच कथित संबंधों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेठमलानी ने इस पूरे विवाद को मौजूदा मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के कार्यभार संभालने से लेकर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और एसआईआर (SIR) से जुड़े मामलों की अदालती सुनवाई तक से जोड़ने की कोशिश की है।

जस्टिस कौल ने पूर्व CJI पर चंद्रचूड़ पर लगाए थे आरोप

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब जस्टिस एसके कौल ने एक इंटरव्यू में देश के पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ पर कड़े आरोप लगाए। जस्टिस कौल का दावा था कि पूर्व CJI कॉलेजियम की औपचारिक मुहर लगने से पहले ही प्रस्तावित नामों पर सरकार के साथ पर्दे के पीछे चर्चा कर लिया करते थे।

जेठमलानी का पलटवार 

पूर्व CJI के खिलाफ आए बयान पर महेश जेठमलानी ने जस्टिस कौल को जवाब दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा-जस्टिस कौल, न्यायिक स्वतंत्रता संवैधानिक सिद्धांत है। जेठमलानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के किसी भी पूर्व जज के लिए खुद यह दावा करना सरासर शोभा नहीं देता कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम किया था। उनके मुताबिक इस बात का फैसला करने का अधिकार देश की जनता के पास होना चाहिए, जो उनके पुराने फैसलों के आधार पर स्वयं मूल्यांकन कर सके। उन्होंने जस्टिस कौल के उठाए मुद्दों के ऊपर भी अंदेशा जताया।

और क्या-क्या आरोप?

जेठमलानी के मुताबिक सबकुछ षड्यंत्र के तहत किया जा रहा। कुछ लोग न्यायपालिका पर अपना दबाव जमाना चाह रहे। SIR ने फर्जी वोटरों को बाहर किया है, जिससे वामपंथी तथा कट्टरपंथी मुस्लिमवादी गुट बौखला गए हैं। इनमें कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कुछ घटक दल भी शामिल हैं। वरिष्ठ वकील ने विशेष रूप से जिक्र किया कि जिस तरह से सौरव दास SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध वाले कार्यक्रमों से जुड़े रहे। वैसे में उनके संग जस्टिस कौल के संबंध गंभीर शक पैदा कर रहे।

जस्टिस कौल से महेश जेठमलानी के दो तीखे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच जेठमलानी ने पूर्व जज के सामने दो स्पष्ट और कड़े सवाल रखे हैं।

1. क्या वे न्यायपालिका से जुड़े लोगों को यह परोक्ष संदेश दे रहे कि वे SIR की वैधता, CEC के अंदरूनी मतभेदों और इसकी कानूनी स्थिति पर सरकार के खिलाफ तथा विरोध जता रहे लोगों के फेवर में निर्णय दे?

2. क्या शीर्ष अदालत का कोई रिटायर्ड जज अपने रुतबे का गलत इस्तेमाल कर विचाराधीन अत्यंत अहम केस के फैसले की दिशा मोड़ने की कोशिश कर रहा?