Upcoming Assembly Elections : आगामी वर्ष की शुरुआत में होने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपना चुनावी खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। संगठन का सबसे ज्यादा जोर उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनावी समर पर दिख रहा। सूत्रों के मुताबिक दोनों सूबों में कई महीनों से संघ की रणनीतिक तैयारी जारी है। इस सिलसिले में नवंबर के पहले सप्ताह में इंदौर शहर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बड़ी बैठक होने जा रही। 2 और 3 नवंबर को होने वाली यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही, जिसमें विपक्षी दलों के एसआईआर (SIR) विरोधी अभियान, नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार, देश विरोधी शक्तियों की हरकतों और माहौल बिगाड़ने वाली गतिविधियों से निपटने पर गहन मंथन किया जाएगा।

'SIR का जमीनी स्तर पर कोई बड़ा असर नहीं'

SIR के मुद्दे पर संघ के शीर्ष सूत्रों का मानना है कि इस विषय का जनता के बीच कोई खास राजनीतिक असर नहीं दिख रहा है। RSS के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक विपक्ष द्वारा 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का जो दावा किया जा रहा, हकीकत में उससे 3 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। बाकी के नाम उन नागरिकों के हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी या फिर जिन्होंने निवास स्थान बदल लिया है।

यूपी में किस बात का डर?

संघ नेता ने बताया कि जिन 3 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर हुए हैं, उन्हें पुनः अपना नाम जुड़वाने का पूरा अवसर दिया जा रहा। उनके अनुसार विपक्षी दल यूपी में SIR के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हैं तो इससे उन्हें राजनीतिक घाटा सहना पड़ेगा। जिस प्रकार बिहार चुनाव के दौरान महागठबंधन को अन्य जरूरी मुद्दों से भटकने के कारण नुकसान झेलना पड़ा था, ठीक वैसा हाल यूपी में भी हो सकता है।

UP में हैट्रिक की तैयारी और पंजाब पर विशेष नजर

यूपी में संघ अपने ढांचे को बेहद मजबूत मान रहा। अपने शताब्दी वर्ष के पड़ाव के दौरान RSS ने देश के इस सबसे बड़े प्रदेश में अपनी जमीनी पैठ को और गहरा किया है। नई शाखाओं का विस्तार किया है। इसके अतिरिक्त राज्य में BJP की सरकार होने का सीधा फायदा भी संगठन को मिला है। इस ताकत के बल पर संघ अब यूपी में BJP को लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने के लिए पूरी ताकत झोंकने की योजना बना रहा। दूसरी ओर पंजाब में भी संघ ने गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) और आम स्थानीय निवासियों के साथ अपना संपर्क अभियान तेज कर दिया है। पंजाब में पैर पसार रही नशाखोरी की गंभीर समस्या पर संघ का विशेष ध्यान है। इंदौर में होने वाले आगामी चिंतन शिविर में इस नशीले तंत्र को तोड़ने पर रणनीति बनाई जाएगी।

विदेशी हस्तक्षेप और डिजिटल कंटेंट पर भी मथेगा संघ

इंदौर में प्रस्तावित कार्यकारी मंडल की बैठक में केवल चुनावी समीकरणों पर नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा में विदेशी ताकतों की दखलअंदाजी और OTT माध्यमों पर दिखाए जाने वाले डिजिटल कंटेंट जैसे ज्वलंत समसामयिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

घर-घर जाकर मतदाताओं को जागरूक करते हैं स्वयंसेवक

RSS का अपने शताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंचना इस बार के विधानसभा चुनावों को और भी खास बनाता है। आमतौर पर संघ सीधे तौर पर चुनावी राजनीति से दूरी बनाकर सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों पर केंद्रित रहता है, लेकिन विधानसभा चुनावों में अपने स्वयंसेवकों के विशाल नेटवर्क के जरिए घर-घर जाकर मतदाता जागरूकता अभियान चलाना और राष्ट्रवाद तथा सुशासन जैसे मुद्दों पर जनमत तैयार करना BJP के लिए हमेशा से मजबूत बैकबोन का काम करता आया है।