दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की रैली को स्थगित करने की मांग के बाद चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली दिवाली के बाद कराने की अपील की थी। इसके बाद कांग्रेस ने संगठन और उसके अध्यक्ष के राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठाए। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस विवाद पर सफाई दी है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल के AAP और BJP नेताओं के साथ राजनीतिक संबंध रहे हैं। कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने सोशल मीडिया पर गोयल की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए सवाल उठाया कि रैली टालने की मांग के पीछे राजनीतिक मंशा तो नहीं है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को होने वाली रैली अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक आयोजित की जाएगी। 

2019 में AAP के टिकट पर लड़ा लोकसभा चुनाव 

बृजेश गोयल का आम आदमी पार्टी से पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में AAP के टिकट पर नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि को आधार बनाते हुए CTI की निष्पक्षता पर संदेह जताया है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि गोयल की BJP नेताओं के साथ नजदीकियां रही हैं। किसी संगठन के अध्यक्ष की पुरानी राजनीतिक संबद्धता अपने आप में उसके मौजूदा पत्र या मांग के पीछे राजनीतिक साजिश का प्रमाण नहीं है। इस संबंध में कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में तस्वीरों और राजनीतिक गतिविधियों का हवाला दिया है। 

AAP ने कहा- बृजेश गोयल अब पार्टी में नहीं हैं

कांग्रेस के आरोपों के बाद AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बृजेश गोयल अब आम आदमी पार्टी का हिस्सा नहीं हैं। भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के बाद गोयल ने अपना राजनीतिक रुख बदल लिया और खुले तौर पर BJP का समर्थन करने लगे। इस तरह CTI अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस और AAP की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस ने उनके राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठाए, जबकि AAP ने उनसे दूरी स्पष्ट करने की कोशिश की।

CTI ने राहुल गांधी को क्यों लिखा था पत्र?

दरअसल, CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल ने 24 अक्टूबर को राहुल गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर की रैली 10 नवंबर यानी भाई दूज के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि दिल्ली में दिवाली से पहले खरीदारी का सीजन चल रहा है और रैली के कारण यातायात प्रभावित होने से कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। CTI ने अपने आकलन में दावा किया था कि रैली के चलते मध्य दिल्ली के करीब 20 थोक और खुदरा बाजारों तक ग्राहकों और मालवाहक वाहनों की पहुंच प्रभावित हो सकती है। संगठन ने त्योहार के दौरान करीब 10 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई थी। यह संगठन का अनुमान है, प्रमाणित नुकसान का आंकड़ा नहीं। 

CTI की मान्यता और राजनीतिक निष्पक्षता पर भी उठे सवाल

इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर CTI के पंजीकरण, कारोबारी प्रतिनिधित्व और बड़े व्यापारिक संगठनों से उसकी संबद्धता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में दावा किया गया है कि संगठन की वेबसाइट पर CIN, PAN और अन्य पंजीकरण संबंधी विवरण उपलब्ध नहीं हैं तथा FICCI, CII, ASSOCHAM, PHDCCI या CAIT जैसे संगठनों की सदस्यता सूची में इसका नाम नहीं है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए केवल वेबसाइट पर जानकारी नहीं दिखने या किसी संगठन की सदस्यता सूची में नाम नहीं मिलने के आधार पर CTI को अपंजीकृत या फर्जी संगठन बताना उचित नहीं होगा। CTI की कानूनी स्थिति और उसके प्रतिनिधित्व के दायरे पर स्पष्ट निष्कर्ष के लिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की जांच जरूरी है। फिलहाल विवाद का केंद्र यह सवाल है कि दिवाली के कारोबार को लेकर CTI की चिंता कितनी व्यावहारिक है और उसके अध्यक्ष की राजनीतिक पृष्ठभूमि का इस मांग से क्या संबंध है। कांग्रेस के आरोप, AAP की सफाई और CTI के कारोबारी तर्कों के बीच 1 नवंबर की रैली को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।